Posts

बदलते बिहार की बदलती राजनीति’।

बिहार में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। जनता अब अपने वोट की ताकत दिखाने के लिए तैयार है। इस बार के चुनाव में कई बड़े मुद्दे सामने आए हैं – बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक न्याय। राजनीतिक दल मैदान में इस चुनाव में तीन बड़े राजनीतिक दलों का जोरदार मुकाबला देखने को मिल रहा है – राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)। सभी दलों ने अपने-अपने घोषणा पत्र जारी किए हैं, जिनमें बिहार की तस्वीर बदलने का वादा किया गया है। जनता को उम्मीद  जनता की उम्मीदें कुछ अलग ही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य, बच्चों की पढ़ाई और रोजगार की मांग कर रहे हैं। वहीं शहरी मतदाता बेहतर सड़कों, बिजली और विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बार के चुनाव में युवा मतदाताओं की भूमिका भी काफी अहम है। सोशल मीडिया पर युवाओं की चर्चा और भागीदारी चुनावी अभियान का केंद्र बन गई है। अपनी पसंद की सरकार चुनना अब आपके हाथ में है। अपना वोट जरूर दें, क्योंकि आपके एक मत से बिहार का भविष्य तय होगा।

बिहार के मुख्यमंत्री

Image
बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह (श्री बाबू) थे, जिनका कार्यकाल 1946 से 1961 तक रहा और जिनके कार्यकाल में कई विवाद और ऐतिहासिक फैसलों की कहानी छुपी है श्रीकृष्ण सिंह का राजनीतिक सफर श्रीकृष्ण सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1887 को बिहार के मुंगेर जिले में हुआ था. स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी के नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभाने वाले श्री बाबू 1937 में अंग्रेजी शासन के दौरान बिहार के प्रधानमंत्री (Premier) बने और 1947 में स्वतंत्रता के बाद उन्हीं का पदनाम ‘मुख्यमंत्री’ हो गया. वे “बिहार केसरी” के नाम से प्रसिद्ध हुए. श्रीकृष्ण सिंह का कार्यकाल एक ओर विकास, औद्योगीकरण, और समाज सुधारों के लिए याद किया जाता है, तो दूसरी ओर नेतृत्व की राजनीति, जातिवाद, और गुटबाजी जैसे विवादों के कारण भी खूब चर्चा में रहा प्रमुख फैसले और विवाद श्रीकृष्ण सिंह ने बिहार में जमींदारी प्रथा को समाप्त करने की ऐतिहासिक पहल की, जिसके कारण वे देश में इस कानून को लागू करने वाले पहले मुख्यमंत्री बने.  इससे जमींदार वर्ग और उनके समूहों में नाराजगी फैली, लेकिन गरीब और किसान तबके में भारी लोकप्रियता ...